टसर रेशम कीट ऐन्थिरिया मॉइलिट्टा (Antheraea mylitta) उलसपजजंद्ध ड्रूरी का देश के विभिन्नराज्यों में व्यवसायिक तौर पर मध्य भारत में 18-27 अक्षांश तथा 80-88 देशान्तर केबीच उश्ण कटिबंधीय ;ज्तवचपबंसद्ध टसर रेशम, रेशम कीट ऐन्थिरिया मॉइलिट्ठा द्वाराउत्पादित वन्य रेशम है। विश्व में भारत का वन्य रेशम उत्पादन में चीन के बाद द्वितीयस्थान है, हमारे देश में टसर रेशम उत्पादित प्रमुख राज्यों में से झारखण्ड, छत्तीसगढ़,उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश इत्यादि है, छ.ग. राज्य टसर रेशमउत्पादन में झारखण्ड के बाद द्वितीय स्थान पर है।।
छ.ग. राज्य कोसा उत्पादन एवं कोसा वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप मेंनिरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य शासन द्वारा वन आधारित ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के संकल्प की प्रतिपूर्ति हेतु रेशम प्रभाग द्वारा ग्रामीण अंचलों में स्थानीय रोजगार उपलब्धकराने के साथ-साथ कच्चे टसर रेशम की मांग की आपूर्ति हेतु सतत् प्रयत्नशील है।
टसर रेशम कीट पालन बाह्य वन्य पारिस्थितियों में उपलब्ध प्राथमिक खाद्य पौधोंटर्मिनेलिया टोमेन्टोसा (साजा), टर्मिनेलिया अर्जुना (कहवा) वनस्पतिक नाम कोम्ब्रीटेसीपरिवार से तथा सोरिया रोबस्टा (साल) वनस्पतिक नाम डिप्टेरोकार्पेसी परिवार से आतेहै, जिनकी पत्तियों पर रेशम कीट अपना खाद्य ग्राह्य कर टसर ककून का उत्पादन करते है।
छत्तीसगढ़ राज्य टसर उत्पादन के क्षेत्र में परंपरागत रूप से विशिष्ट स्थान रखता है। छत्तीसगढ़राज्य कोसा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में निरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य शासन द्वारा वनआधारित ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के संकल्प की प्रतिपूर्ति हेतु कोसा रेशम योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। रेशम प्रभाग द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अंचल में निवास कर रहे अनुसूचित जाति,जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के निर्धन परिवारों को स्व रोजगार उपलब्ध कराते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगारसृजित किया जा रहा है, एवं प्रदेश में टसर धागे की मांग की आपूर्ति की जा रही है।
ग्रामोद्योग संचालनालय रेशम प्रभाग द्वारा संचालित टसर रेशम विकास योजना, पालित एवं नैसर्गिककोसा का विकास, मलबरी रेशम विकास, टसर धागाकरण समस्त योजनाओं के माध्यम से दिसम्बर-20 तक 50465 हितग्राही/श्रमिक लाभांवित हुए हैं।
संचालित योजनायें –
- टसर रेशम विकास एवं विस्तार कार्यक्रम –टसर रेशम विकास एवं विस्तार योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित टसरबीज केन्द्रों, पायलट प्रोजेक्ट एवं अन्य योजनाओं के अंतर्गत स्थापित केन्द्रों को बीज उत्पादन,पालित ककून उत्पादन एवं केन्द्र संधारण, नैसर्गिक बीज प्रगुणन एवं ककून संग्रहण तथाधागाकरण से संबंधित कार्य किये जाते हैं।
- पालित डाबा टसर ककून उत्पादन योजना – पालित टसर की गतिविधियों को संचालित करने हेतु विभाग द्वारा हितग्राहियों को निम्नसुविधा प्रदान की जाती है :- 1. पालित टसर कृमिपालक स्वस्थ डिम्ब समूह योजना अंतर्गत हितग्राहियों को व्यापारिकटसर स्वस्थ डिम्ब समूह प्रति स्वस्थ डिम्ब समूह रू. 10.00 एवं टसर बेसिक/न्यूक्लियसस्वस्थ डिम्ब समूह की राशि रू. 12.00 केन्द्रीय रेशम बोर्ड द्वारा निर्धारित की गई है।हितग्राहियों से ली जाने वाली राशि रू. 2.00 निर्धारित की गई है। हितग्राहियों द्वाराभुगतान की जाने वाली शेष राशि विभाग द्वारा सहायता के रूप में प्रदान की जाती है।
- नैसर्गिक बीज प्रगुणन एवं कोसा उत्पादन योजना – रेशम प्रभाग द्वारा रैली कैम्प, विभागीय मद से कैम्प आयोजित कर प्राकृतिक वन खण्डों मेंनर-मादा तितलियॉ एवं उत्सर्जित अण्डो का विस्तार कर नैसर्गिक कोसा के वंशवृद्धि हेतुकिया जाता है। वर्ष 2020-21 में जिला जगदलपुर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर,नारायणपुर, गरियाबंद, मुंगेली, बिलासपुर एवं जशपुर जिले में 46 रैली बीज प्रगुणन कैम्पविभागीय मद से आयोजित किए गए है। उक्त अण्डों से वन खण्डों में बिना किसी मानवीय सहयोग के प्राकृतिक रूप से नैसर्गिक टसर ककून का उत्पादन होता है। उक्त नैसर्गिक ककून का संग्रहण ग्रामीण अंचल केअनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं अन्य वनवासी परिवारों के द्वारा किया जाता है।
- टसर ककून उत्पादन का अधिक लाभ स्थानीय हितग्राही प्रदान करने हेतु (टसर धागाकरण योजना) – प्रदेश के विभिन्न जिलों में उपलब्ध 3009 टसर मोटराइज्ड रीलिंग स्पिनिंग तथा बुनियादमशीनों के माध्यम से दिसम्बर 2020 तक 150 कोसा धागाकरण स्व-सहायता समूह के सदस्यों द्वारा 7072 किलोग्राम रील्ड, स्पन एवं घींचा धागा का उत्पादन किया गया है। दिसम्बर 2020 तक 3746 किलोग्राम रील्ड, स्पन एवं घींचा धागा का विक्रय बुनकरों एवं कोसा वस्त्र निर्माणकरने वाले व्यापारियों को ककून बैंक द्वारा राशि रू. 1 करोड़ 12 लाख का किया गया है।
- मलबरी रेशम विकास एवं विस्तार कार्यक्रम – वर्तमान में ग्रामोद्योग संचालनालय (रेशम प्रभाग) द्वारा संचालित मलबरी रेशम विकास एवंविस्तार योजना अंतर्गत 610 एकड़ क्षेत्र पौधरोपणयुक्त उपलब्ध है। राज्य में कुल 66 मलबरीरेशम/बीज केन्द्र एवं अनुसंधान केन्द्र संचालित है। विभाग द्वारा हितग्राहियों को निःशुल्क तकनीकी मार्गदर्शन एवं योजनांतर्गत उत्पादितमलबरी ककून का मूल्य गुणवत्ता आधारित सफेद मलबरी ककून (बाय ग् बाय) 200 रू., प्रति कि0ग्रा0 एवं पीला मलबरी ककून (मल्टी ग् बाय) 175 रू. प्रति कि0ग्रा0 तथा मलबरी बीज ककून पर प्रोत्साहन राशि 180 रू., प्रति कि0ग्रा0 बीज ककून उत्पादकों हेतु अतिरिक्त राशि निर्धारितकी गयी है। शहतूत पौधरोपण हेतु सामग्री सहायता एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करायाजाता है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सिल्क फेडरेशन (रेशम गतिविधि) के अंतर्गत वर्तमान में 18 ककून बैंक संचालित है तथा उत्पादित टसर एवं मलबरी ककून शासन द्वारा निर्धारित दरपर क्रय-विक्रय किया जाता है।
- लद्यु निर्माण के अंतर्गत रेशम एवं टसर केन्दों के बुनियादी सुविधा का विस्तार – लघु निर्माण योजना के अंतर्गत रेशम प्रभाग द्वारा पूर्व से स्थापित रेशम एवं टसर केन्द्रों मेंकृमिपालन गृह, ग्रेनेज भवन, ककून गोडाउन, चॉकी कृमिपालन भवन का उन्नयन एवं नवीननिर्माण के साथ-साथ फेसिंग और सिंचाई सुविधा का विस्तार किया जाता है। इस वर्शबुनियादीसुविधा के अंतर्गत टसर एवं रेशम केन्द्रों पर ट्यूबवेल खनन एवं विद्युत व्यवस्था हेतु जिलाजशपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर, कोण्डागांव, कबीरधाम, बेमेतरा, महासमुंद रायगढ़ हेतु बजट आबंटन प्रदान किया गया है।
